ग्वालियर की पहली महिला मंडली 16 साल से घर-घर जाकर कर रहीं सुंदर कांड और अखंड रामायण पाठ
बात जब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तीकरण की हो रही है तो ग्वालियर के महिला मंडल को कैसे भूला जा सकता है। शहर में बीते 16 साल से महिलाओं की एक मंडली घर-घर जाकर संगीतमय सुंदरकांड पाठ, अखंड रामायण पाठ करती हैं। यह जिले का पहला महिला दल है जो सुंदरकांड, अखंड रामायण पाठ के कार्यक्रम करती हैं।
अभी तक यह काम पुरुष प्रधान माना जाता था। सुंदरकांड पाठ में हनुमान जी की भक्ति रहती है, इसलिए सुंदरकांड पाठ पर पुरुषों का वर्चस्व है। पर इन 6 महिलाओं ने न केवल पुरुषों के सुंदरकांड पाठ करने के मिथक को तोड़ा है बल्कि अपनी एक पहचान भी बनाई है। शहर में यह यह दल सुंदरकांड महिला मंडली के नाम से ही जाना जाता है।
कैसे शुरू हुआ सफर
महिला मंडली की मुखिया और संस्थापक 69 वर्षीय सरोज शर्मा निवासी गांधी नगर हैं। करीब 16 साल पहले उन्हें घर पर सुंदरकांड पाठ कराना था, लेकिन कोई पुरुष पंडित या सुंदरकांड मंडली तैयार नहीं हो रही थी। उस समय उनके मन में आया कि जो सुंदरकांड पुरुष मंडली कर सकती है उसे महिला मंडली क्यों नहीं कर सकती। रही भगवान हनुमान जी की बात तो वह महिला, पुरूष किसी में भेद नहीं करते हैं। महिला और पुरुष का भेद लोगों ने बनाए हैं। इसके बाद सरोज ने पहला कार्यक्रम अपने घर पर किया। वो सफल रहीं और लोगों को सबक मिला। इसके बाद वह उनके कदम ऐसे बढ़े कि 16 साल से निरंतर बढ़ते चले जा रहे हैं।
5 महिलाओं की टीम, कई पुरुषों पर भारी
69 वर्षीय सरोज शर्मा की टीम में 5 स्थायी सदस्य हैं। सभी सदस्य महिलाएं हैं। सरोज खुद ढोलक बजाती हैं। महिला मंडली की अन्य सदस्यों में 58 वर्षीय विमला देवी, 46 वर्षीय रमा कुमारी, 52 ममता देवी, 43 वर्षीय हेमलता हैं। साथ ही कार्यक्रम के समय इतनी ही सदस्य अस्थायी मिल जाती हैं। इसके बाद जब यह संगीतमय सुंदरकांड या अखंड रामायण का पाठ करती हैं तो पुरुष मंडली पर भारी पड़ती हैं।
भक्ति के साथ अजीविका का भी साधन
सरोज शर्मा ने बताया कि जब उन्होंने यह महिला मंडली बनाई तो शुरू-शुरू में महिलाओं को घर-घर जाकर कार्यक्रम करने में कुछ परेशानी हुई, लेकिन उसके बाद सब आसान होता चला गया। वह एक कार्यक्रम का 1100 रुपए या 2100 रुपए तक लेती हैं। किसी की स्थिति यह राशि देने की नहीं होती है और वह सुंदरकांड, अखंड रामायण का कार्यक्रम कराना चाहता है तो महिला मंडल भक्तिभाव में भी काम करता है। इससे भक्ति भी हो जाती है और मंडली के सदस्यों की अजीविका भी चल जाती है।