10 माह से दादाजी दरबार में समाधि पर माथा नहीं टेक पा रहे भक्त, ट्रस्टी नागौरी बोले- इससे भक्त और सेवादार दोनों सुकून में

दादाजी दरबार खंडवा में कोरोना के कारण शुरू की गई माथा नहीं टेकने और समाधि स्पर्श नहीं करने की व्यवस्था अब भी जारी है। भज लो दादाजी का नाम... भज लो हरिहरजी का नाम... के साथ श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर रहे हैं। समाधि तक श्रद्धालुओं के नहीं पहुंचने से सेवादार भी राहत महसूस कर रहे हैं। ऐसे में भक्त इस व्यवस्था को आगे भी जारी रखने की मंशा जता रहे हैं। ट्रस्ट का मानना है कि इससे भक्त और सेवादार दोनों सुकून में हैं।

खंडवा में दादाजी धूनीवाले और छोटे दादाजी की समाधि होने के साथ ही धूनी मैया हैं। हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु यहां दोनों समाधि पर माथा टेकने के साथ ही धूनी में कभी भी हवन कर सकते है। कोरोना के कहर में यहां हवन-पूजन जारी रहा, लेकिन श्रद्धालुओं के समाधि पर माथा टेकने और स्पर्श करने पर रोक लगा दी गई थी। श्रद्धालुओं से नारियल, माला और चादर भी बाहर ही रखवाए जाने लगे। हवन करने की प्रक्रिया जारी रही।

अब देश के अधिकांश मंदिरों में दर्शन-पूजन शुरू हो गए हैं, जबकि दादाजी दरबार में समाधि पर माथा टेकने और स्पर्श करने पर अभी भी रोक है। नारियल धूनी में भेंट किए जा सकते हैं। यहां आने वाले नर्मदा परिक्रमावासियों के भोजन प्रसादी की व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है।

दादाजी मंदिर के ट्रस्टी सुभाष नागौरी ने कहा, गुरुपूर्णिमा पर भी दूर से ही दर्शन करने की अनुमति दी गई थी। बरसी उत्सव में भी ऐसा ही हुआ। सिर्फ भोग लगाने के लिए सेवादार थाली रखकर वापस आ सकते हैं। ट्रस्टी सुभाष नागौरी ने कहा, यह व्यवस्था काफी हद तक सुखद भी है। आने वाले श्रद्धालुओं को नियमों की जानकारी नहीं होने से वह कई बार दर्शन के दौरान गलती करते थे, जिन्हें रोकना सेवादारों की जिम्मेदारी रहती है। अब सेवादारों को इससे राहत है। इसके अलावा समाधि श्रंगार के दर्शन भी श्रद्धालु कर पा रहे हैं।