वार्डवार निगरानी व्यवस्था खत्म, अब आने-जाने वालों पर निगाह रखने की तैयारी

कोरोना मरीज व संदिग्धाें की मॉनिटरिंग के लिए इंसीडेंट कमांडर्स टीम की बनी हुई व्यवस्था को फिर से सक्रिय किए जाने की तैयारी की जा रही है। ये व्यवस्था उपचुनाव के दौरान निष्क्रिय हो गई और इसका असर मरीजों की कांटेक्ट ट्रेसिंग व उनकी मॉनिटरिंग पर आया।

हाल में ब्रिटेन से आए लोगों को भी समय पर इसी कारण से ट्रेस नहीं किया जा सका। इसका नतीजा ये रहा कि स्पेन से आया एक व्यक्ति वापस जा चुका है और अब प्रशासन उसके परिजनों की जांच करा रहा है। यदि काेराेना के नए स्ट्रेन का कोई केस मिलता है और मरीजों की संख्या बढ़ती है तो फिर से पहले की तरह का मॉनिटरिंग सिस्टम लागू होगा।

कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि काेराेना के नए स्ट्रेन को लेकर अलर्ट हैं और जो एक व्यक्ति बिना किसी जांच के स्पेन वापस चला गया है उसके परिजनों की जांच करा रहे हैं। उस व्यक्ति की भी जांच रिपोर्ट परिजनों से मंगाई जा रही है। बाहर से आने वालों को ट्रेस करने और मॉनिटरिंग के लिए अधिकारियों की टीम बना रहे हैं। बाकी सभी काम सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन के अनुसार ही होंगे।

अब कंटेनमेंट जोन तक नहीं

मार्च से कोरोना मरीज और संदिग्धाें को लेकर सख्ती बरती गई। जिसका नतीजा ये था कि किसी भी मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों काने तत्काल ट्रेस करके जांच की जाती थी। संदिग्धाें को क्वारेंटाइन रखा जाता और मरीजों के घर के आसपास कंटेनमेंट जोन बनाए जाते थे। लेकिन अब पिछले कुछ महीनों से ये सब प्रक्रिया बंद हो चुकी हैं।

अब कोरोना मरीजों के घर के पास का क्षेत्र बेरीकेड्स लगाकर कंटेनमेंट जोन भी नहीं बनाया जा रहा है, न उनके दरवाजे पर कोविड पैम्पलेट चस्पा हो रहे। जिस वजह से होम आइसोलेट वाले कई मरीज घरों के बाहर घूमते रहते हैं और आसपास के लोगों को पता ही नहीं होता कि वे कोरोना मरीज के संपर्क में हैं। ऐसी कई शिकायतें क्षेत्रों के एसडीएम के पास पहुंच रही हैं।

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग सेनिटाइजेशन व सर्वे का काम भी बंद कर चुके हैं। जबकि पहले जो भी व्यक्ति संक्रमित पाया जाता था उसके घर के बाहर एवं आसपास रोजाना सेनिटाइज्ड किया जाता था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मरीज को फोन करके जानकारी जुटाते थे।