विद्यार्थियों का ज्ञान और कौशल देश के विकास की अमूल्य निधि : राज्यपाल श्री पटेल

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया है कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है, वह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं है। यह देश के विकास की अमूल्य निधि है। दीक्षांत भावी जीवन की नई जिम्मेदारियों और नई संभावनाओं का महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के द्वादश (12वें) दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय में आप सबने जो सीखा है, उन्हें आचरण में भी उतारें। राज्यपाल ने कहा कि अपने ज्ञान का उपयोग कृषि की ऐसी व्यवस्था में करें, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर भावी पीढ़ियों का भविष्य संवारे। दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदकों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि श्री दिनेश कुलकर्णी, विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, प्रमंडल के सदस्यगण, कुलसचिव श्री अजय कौशल एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष मंचासीन थे। इस अवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे तथा जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत भी मौजूद थे।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि कृषि शिक्षा की सार्थकता देश की मिट्टी, जल, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के संरक्षण के साथ करोड़ों किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करने में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। बदलाव के इस दौर में विज्ञान, तकनीक और नए विचारों के सहारे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। जलवायु परिवर्तन, घटती जोत, मिट्टी की सेहत और जल संकट जैसी वर्तमान चुनौतियों के समाधान खोजकर उत्पादन की अस्थिरता को खत्म करना होगा।