हाईकोर्ट की जांच में हुआ खुलासा-सड़क कागज में 80एमएम और मौके पर 44.45 एमएम पाई गयी, डामर की परत और एमबी है गायब
ग्वालियर. शहर की सड़कों के निर्माण और भुगतवान का लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में पेश विशेष एडवोकेट कमिश्नर और 6 सदस्यीय तकनीकी दल की जांच रिपोर्ट में गंभीर खामियां पाई गयी है। बेटी बचाओं तिराहा से गुढ़ागुढ़ी का नाका, हनुमान टॉकीज, श्मशान, गुढ़ा तिराहा, कस्तूरबा चौक होते हुए पद्मा विद्यालय तक की सड़क की जांच में कागज और मौके पर निर्माण की मोटाई में बड़ा अंतर पाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एस्टीमेंट और मेजरमेंट बुक (एमबी) में सड़क की बिटुमिनस लेयर की मोटाई 80 एमएम दर्ज थी। जबकि कोर कटिंग में यह सिर्फ 44-45 एमएम मिली। जांच में डब्ल्यूएमएम गुणवत्ता। मिट्टी की डेंसिटी और डामर की मात्रा में भी मानकों से कमी सामने आयी है।
1125 की जगह एमबी में 1440 क्यूबिक मीटर डब्ल्यूएमएम
जांच में सामने आया है कि एस्टीमेंट में 1125क्यूबिक मीटर डब्ल्यूएमएम का प्रावधान था। लेकिन एमबी में इसकी मात्रा बडढ़ाकर 1440.31 क्यूबिक मीटर दर्ज की गयी। लोकेशन नम्बर 6 पर सड़क खुदाई के दौरान डब्ल्यूएमएम लेयर की जगह नीचे निर्माण का मलबा दबा हुआ मिला। जांच दल ने डब्ल्यूएमएम के साइज को भी निर्धारित मानक के अनुरूप् नहीं पाया है।
2.68 करोड़ रूपये के टेंडर, नोटशीट से बदला बजट और लोकेशन
जांच दल ने सड़क का मूल टेंडर सिंधी कॉलोनी मार्ग के लिये 2.66 करोड़ रूपये में जारी किया गया था और बाद में बिना नयो टेंडर किये नोटशीट के माध्यम से इसकी लोकेशन बदलकर गुढ़ा-गुढ़ी का नाका कर दी गयी। इसके साथ ही बजट बढ़ाकर 3.01 करोड़ रूपये कर दिया गया।
सेकेण्ड बटालियन के सामने जांच के दौरान सड़क की खुदाई की गयी यहां डामर की पतली परत के नीचे पुरानी सीसी सड़क मिली। रिपोर्ट में इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पुराने बेस पर ही नयी सड़क का काम दिखाकर भुगतान िकया गया।
जांच में मेजरमेंट बुक को लेकर भी गंभीर सवाल उठाये गये। पीडब्ल्यूडी के नियमों के मुताबिक निर्माण कार्य का मान किलोमीटर और चेनेज के हिसाब से दर्ज किया जाना चाहिये था। लेकिन एमबी में केवल जगहों के नाम लिखे पाये गये। जांच के दौरान नगरनिगम की तरफ से संबंधित मेजरमेंट बुक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।