अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाये जाएंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि हम पूरी वसुधा को अपना कुटुंब समझते हैं। हम सबके कल्याण की कामना करते हैं। सदियों से गुरूकुल शिक्षा पद्धति हमारी पहचान रही है। गुरू-शिष्य परम्परा से हमारी कई पीढ़ियां शिक्षित-दीक्षित, पोषित और पल्लवित हुई हैं। हमारे महाविद्यालय उसी परम्परा के प्रतीक हैं। इनमें शिक्षा देने वाले अतिथि विद्वान युवा पीढ़ी का भविष्य संवारने वाले पावन मंदिर के पुजारी हैं, जो अनेक युवाओं के जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं। अतिथि विद्वानों के परिश्रम का सम्मान करते हुए राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वानों की सभी मांगों पर विचार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। इस समिति की अनुशंसाएं आना अभी शेष है। समिति की अनुशंसाएं प्राप्त होते ही सरकार उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों के हित में आवश्यक संभव कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालयों में सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों द्वारा इनके हित में कई नवाचारी एवं सम्मानपूर्ण निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय अभिनदंन किया गया। अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री का अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर एवं तुलसी का पौधा भेंटकर स्वागत किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अतिथि विद्वान हमारे परिवार के सदस्य हैं। इनके कल्याण के लिए हम हमेशा से प्रतिबद्ध हैं। अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति देश के दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी और मध्यप्रदेश में सबसे बेहतर मॉडल वाली व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश के हर जिले में एक-एक पीएमश्री एक्सीलेंस कॉलेज खोले हैं। खरगौन, गुना और सागर में नए शासकीय विश्वविद्यालयों की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। बेहतर स्कूल शिक्षा के लिए राज्य में सांदीपनि विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले राज्य के सकल पंजीयन दर और राष्ट्रीय दर में बड़ा अंतर था, परंतु आज प्रदेश का सकल पंजीयन दर (जीईआर) राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर हो गई है। स्कूल शिक्षा में भी मध्यप्रदेश की ड्रॉप आउट दर शून्य पर आ गई है।