सत्य, धर्म और पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति की आत्मा : राज्यपाल श्री पटेल

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा, सत्य बोलना, धर्माचरण और पर्यावरण संरक्षण हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने आचरण में संस्कार, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को आत्मसात करें।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री पटेल शुक्रवार को वसंत पंचमी के अवसर पर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने समारोह में विद्यार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि, स्वर्ण पदक तथा विभिन्न उपाधियाँ प्रदान की। दीक्षांत समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार भी मौजूद थे।

उपाधियाँ, समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि समारोह में प्रदान की गई उपाधियाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक है। विद्यार्थी जीवन में नए अवसरों और चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर सीखते रहें। आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि अपने ज्ञान, कौशल, शोध और नवाचार के माध्यम से देश को निरंतर आगे बढ़ाएँ।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय या विश्वविद्यालयों से नहीं, बल्कि परिवार और समाज से भी व्यक्ति जीवन मूल्यों की शिक्षा प्राप्त करता है। आज के विद्यार्थी ही कल के विकसित भारत की नींव हैं। शिक्षा का लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना भी होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक, कौशल आधारित और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने में नई शिक्षा नीति की सराहनीय भूमिका है।