श्रीमहाकाल महोत्सव श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा से जोड़ने का माध्यम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महोत्सव से उज्जैन की सुंदरता को स्वर्ग के समान बना दिया है। आज की उज्जैन नगरी महाकवि कालिदास की रचनाओं की अवंतिका के समान हो गई है। सम्राट विक्रमादित्य  और राजा भोज के काल से अवंतिका नगरी न्याय और प्रशासनिक दक्षता की वाहक है। सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज और अवंतिका नगरी की अन्य महान विभूतियों और प्रेरक कहानियों को श्री महाकाल महालोक में मूर्ति कला और दीवारों पर चित्रों के माध्यम से बड़ी सुंदर तरीके से दर्शाया गया है। श्री महाकाल की नगरी काल की नगरी है। श्री महाकाल की कृपा से हमारी प्रत्येक सांस है और प्रेरणा से यह जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित है। प्रदेश ने धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर अपनी नवीन पहचान स्थापित की है । श्री महाकाल महोत्सव  श्रद्धालुओं को आध्यात्म, धर्म  और प्रदेश  की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का माध्यम है। इससे श्रद्धालुओं को बाबा का आशीर्वाद भी मिलेगा, और उज्जैन की जानकारी भी मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मकर संक्रांति पर्व की पावन संध्या पर पूजन अर्चन कर श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर  प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल,राज्य सभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री सत्य नारायण जटिया,श्री संजय अग्रवाल, श्री राजेश धाकड़, श्री रवि सोलंकी, श्री श्री नरेश शर्मा, श्री श्रीराम तिवारी,श्री रूप पमनानी  आदि जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग है ,दोनों ज्योतिर्लिंग की कनेक्टविटी सड़क ,वायु और रेल मार्ग से बढ़ाकर श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान की जा रही है। उज्जैन में तो शक्ति पीठ माता गढ़ कालिका भी है साथ ही यहाँ शिप्रा के किनारे गुरुद्वारा  है जहां श्री गुरु नानक जी आए और उज्जैन का उल्लेख अपने पदों में किया है। उज्जैन की विविधता और समरसता निराली है।