कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमर सिंह माहौर ने की आत्महत्या, नहीं मिला सुसाइड नोट, आत्महत्या की वजह की गयी एफआईआर है

ग्वालियर. कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमरसिंह माहौर 58, ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना गुरूवार की देरह शाम की है। वह घर पर अकेले थे। परिवार वाले घर पहुंचे, तब घटना का पता चल सका। उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, पुलिस इसका पता लगाने में जुटी है। पीएम के बाद देर रात को शव को परिजनों के हवाले किया। शहर के माधवगंज थाना इलाके स्थित पान पत्ते की गोठ में रहने वाले अमरसिंह माहौर पेशे से एवोकेट थे उनका कोई बेटा नहीं था इसलिये मुखाग्नि बेटी ने दी।
क्या है पूरा मामला
जमीन की नोटरी संबंधी गलत दस्तावेज तैयार करनेके मामले में न्यायालय के आदेश दर्ज एफआईआर, बेहटा चौकी प्रभारी रामचन्द्र शर्मा ने बताया कि 26 नम्बर को न्यायालय के आदेश पर पदमपुर खेरिया निवासी धारासिंह की शिकायत पर प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह चौहान व अमरसिंह चौहान के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसमामले में संदीप ने लगभग 7 बीघा धमीन के नामांकन आदि के दस्तावेज नोटरी अमरसिंह माहौर के माध्यम से तैयार करवाये थे। धारासिंह ने कहना है कि दस्तावेज फर्जी थे। इस मामले में हाईकोर्ट से विगत दिवस 1 लाख की अग्रिम जमानत अमरसिंह को सशर्त मिल गयी थी। टीआई माधौगंज प्रशांत शर्मा ने बताया कि घटनास्थल से सुसाइट नोट नहीं मिला है। परिवार के लोग फिलहाल बयाने देने की स्थिति में नहीं है। फिलहाल पता नहीं चला सका है कि उन्होंने यह कदम क्यों उठाया।
अमरसिंह का राजनैतिक सफर
अमर सिंह 1976-78 में माधव महाविद्यालय छात्र संघ में पदाधिकारी बने। इसके बाद एआईएसएफ से जुड़कर छात्र राजनीति की और फिर भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी की सदस्यता ली।
1984 में अमरसिंह माहौर ने लोकसभा चुनाव में माधवराव सिंधिया के चुनाव प्रचार के दौरान मुरार की प्रचार सभा के दौरान कांग्रेस में शामिल हो गये ।तब से वह लगातार कांग्रेस के पदाधिकारी रहे।
कांग्रेस सरकार में अमरसिंह ग्वालियर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष भी रहें वह कांग्रेस के बेदाग छवि वाले नेता और प्रखर वक्ता माने जाते थे। कांग्रेस के शासन के दोरान जीडीए के उपाध्यक्ष रहते हुए अमर सिंह ने बीड़ी श्रमिकों के लिये 1 रूपये की किश्त पर 18 आवासों का आवंटन कराया था। इससे वह चर्चा में आये थे।