कथावाचक धमेन्द्र झा ने सुसाइड से पहले बनाया वीडियो, पत्नियों को बताया जिम्मेदार

ग्वालियर. भजन गायक और कथावाचक ने फंासी लगा ली। घटना शुक्रवार की सुबह जनकगंज के ढोलीबुआ पुल की है। आत्महत्या से पहले उन्होंने वीडियो बनाकर अपने भाई को भेजा, इसमें कहा पत्नी से लेकर छुड़ा दिये। काम-धंधा छुड़ा दिया। मेरी मां के खत्म होने के बाद मेरी भाभी ने मुझे बचपन से पाला और इसने उन पर भी गंदे आरोप लगाये। मैंने जितीन प्रताड़ना झेली है कोई नहीं झेल सकता है।
कथावाचक ने डेढ वर्ष पूर्व लव मैरिज की थी। यह उनकी दूसरी शादी की थी। उन्होंने वीडियो में पहली पत्नी को भी आत्महत्या के लिये जिम्मेदार बनाया है। कथावाचक धर्मेन्द्र झा 35, शहर के जनंकगंज इलाके में ढोलीबुआ के पुल के रहने वाले थे। सुबह पत्नी नेहा कमरे में पहुंची तो शव पंखे के कुंदे से फांसी पर लटके मिले। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की तो पता लगा कि सुसाइड से पहले 6.23 बजे धर्मेन्द्र ने वीडियो अपने भाई के मोबाइल पर भेजा था।
ठाकुर जी ने जितनी जिन्दगी दी उतनी जीकर जा रहा हूं
दोनों औरतों की वजह से मैं आज सुसाइड कर रहा हूं। मेरे जाने के बाद मेरी सारी चीजों पर हक सिर्फ मेरे घरवालों का होगा। सभी को राधेश्याम….ठाकुर जी ने जितनी जिन्दगी दी, उतनी जीकर जा रहा हंू। मैं तो बहुत कुछ करने की कोशिश की….लिहाज करने की कोशिश करता था लेकिन इन्होंने कभी कुछ करने नहीं दिया। जीवन नर्क बना दिया। आज कुछ बचा नहीं इसलिये सभी को राम-राम।
पहली पत्नी ने रेप का झूठा केस लगाया था
इस बीच मैंने रिपोर्ट करने की कोशिश की तो वकीलों ने सलाह दी कि आजकल औरतों की सुनवाई है। तुम्हारी पहली पत्नी ने भी झूठा केस लगाया था तुम पर…। उसने मुझ पर रेप का केस लगाया था। अंधा कानून मर्द को कसूरवार ठहराता है। उस समय बरी कर दिया, लेकिन मेरी उस जिंदगी का क्या, जो बर्बाद हो गई। ये औरत भी मेरी मौत की जिम्मेदार है। मेरी पिछली सारी जिंदगी बर्बाद कर दी।
गुहार लगा रहा हूं कि दोनों को कड़ी सजा दें
कानून बरी कर देता है। बरी करने से क्या फायदा? जब मेरी बदनामी हो गई, मेरा सब कुछ छिन गया। दोबारा से रेप्यूटेशन बनाई है मैंने…। भारत के कानून ने औरत को इतनी छूट दे दी है कि वो कभी भी किसी मर्द को फंसा सकती है। मैं एक बात पूछता हूं कि सिर्फ आदमी ही दोषी है हर बार? अगर अंधा कानून नहीं है, थोड़ी सी भी आंख खुली हैं तो मैं एक गुहार लगा रहा हूं कि दोनों को कड़ी सजा दें। कानून में थोड़ा सा बदलाव लाएं, ताकि जिन मर्दों का औरतों ने जीवन नर्क बना रखा है, वे गुहार लगा सकें।