अब दिल्ली से ग्वालियर के बीच भी विस्टाडोम कोच के साथ ट्रेनों को दौड़ाने की तैयारी

ग्वालियर. अभी ट्रेन के सफर के दौरान यात्रियों को सिर्फ खिडकियों के माध्यम से ही बाहर के नजारे नजर आते है लेकिन अब रेलवे द्वारा यात्रियों को प्रीमियम एक्सपीरियंस देने की तैयारी की जा रही है। रेलवे अब लक्जरी ट्रेनों को विस्टाडोम कोच यानी पारदर्शी कोच के साथ चलाने के प्रयास किए जा रहे है। इस कोच की खासियत यह है कि इसकी खिडकियों का आकार काफी चौडा होता है। कोच की छत भी पारदर्शी होता है। कोच की छत भी पारदर्शी होती है। ऐसे में यात्रियों को ज्यादा बेहतर आर बडा व्यू मिल पाता है। प्राथमिक तौर पर गतिमान एक्सप्रेस को विस्टाडोम कोच के साथ चलाने की तैयारी की जा रही है। यात्री जब विस्टाडोम कोच में सफर करते है तो उन्हें आसमान भी दिखाई देता है। प्राकृतिक खूबसूरती को पास से निहारने के लिए विस्टाडोम कोच बेहद खास होते है।
विस्टा का अर्थ होता है परिद्रश्य और डोम का अर्थ गुंबद जैसे आकार से है यानी गुंबद आकार की ट्रेन में आसपास के द्रश्यों को देखना और आनंद लेना। अभी तक ये ट्रेन विदेशों में ही चलती देखी जाती थी लेकिन पर्यटन को बढावा देने के लिए भारतीय रेलवे ने यूरोपियन देशों की तज्र पर इन विस्टाडोम कोचों को तैयार किया है। इस ट्रेन में बडी-बडी कांच की खिडकियां लगी होती है।
इसके एक कोच में कुल 44 सीटें होती हैं, इसके चलते कोच में काफी जगह होती है। सीटों को भी चारों ओर 180 डिग्री पर घुमाया जा सकता है। वर्तमान में विस्टाडोम कोच दादर और मडगांव, कश्मीर वैली, अराकू वैली, जीरो वैली, कांगड़ा वैली, माथेरान वैली, दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे, कालका शिमला रेलवे, नीलगिरि माउंटेन और मुंबई-गोवा मार्ग, मंगलुरु-बेंगलुरु जैसे शहरों में चलती हैं। यात्रियों को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए कोच में इंटरनेट और मनोरंजन की दुनिया से जुड़ने के लिए वाई-फाई की भी सुविधा होती है। अब दिल्ली से ग्वालियर के बीच भी विस्टाडोम कोच के साथ ट्रेनों को दौड़ाने की तैयारी है।