MP में सिंधिया का बढ़ा कद, अंचल के सांसदों से समन्वय बड़ी चुनौती

ग्वालियर. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में मध्य प्रदेश के पांच चेहरे हैं। इनमें से दो बड़े चेहरे ऐसे हैं, जिनकी पहचान विकास कार्यों व नवाचार से है। पहला चेहरा शिवराज सिंह चौहान व दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया का है। पूर्व मुख्यमंत्री चौहान की लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश में सरकार की वापसी के साथ लोकसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत का आधार प्रदान किया है। वही सिंधिया ने नागरिक उडड्यन के क्षेत्र काफी उपलब्धियां हासिल की हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दूसरी बार दिल्ली में सरकार में शामिल हुए सिंधिया का प्रदेश में कद बढ़ेगा, लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल को विकास के पथ पर ले जाने के लिए तीन अन्य सांसदों से समन्वय उनके लिए बड़ी चुनौती है। इसकी वजह है कि अंचल के तीनों सांसद सिंधिया के विपरीत खेमे से आते हैं। इससे पहले भी सिंधिया को अंचल में ग्वालियर के पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर व गुना शिवपुरी के केपी सिंह के विरोध का सामना करना पड़ा था। मुरैना, भिंड व ग्वालियर के नव निर्वाचित सांसद से आंतरिक खेमेबाजी के कारण सिंधिया की केमिस्ट्री नहीं बनती है। अगर यह केमिस्ट्री और बिगड़ती है तो निसंदेह इसका सीधा असर अंचल के विकास पर नजर आयेगा।
सिंधिया ने अंचल को कई बड़े शहरों से जोड़ा
नागरिक उड्डययन मंत्रालय का दायित्व संभालने के बाद सिंधिया ने अंचल के विकास को गति दी। महमज 18 माह में ग्वालियर में इंदौर से ब़ड़ा नया और भव्य एयरपोर्ट दिया। शहर की ट्रैफिक समस्या को सुधारने के लिए एलिवेटेड रोड को साकार रूप दिया। इसके अलावा जबलपुर में भी नया एयरपोर्ट के साथ प्रदेश को हवाई मार्ग से देश के अन्य राज्यों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। चंबल से पानी लाने की योजना के पीछे भी निरंतर लगे हुए हैं।
अंचल के निर्वाचित सांसदों से तालमेल बैठाना बड़ी चुनौती
अंचल के विकास के लिए सिंधिया को नवनिर्वाचित सांसद भारत सिंह कुशवाह(ग्वालियर) शिवमंगल सिंह तोमर (मुरैना) संध्या राय(भिंड) से तालमेल बैठाना बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह तीनों सांसद प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के खेमे से हैं। तोमर फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर हैं, किंतु इन तीनों सांसदों की डोर उनके हाथ में मानी जा रही है।