आराम करने के लिये एसी रूम में ठहरते थे कंजर गिरोह के सदस्य, वारदात करने के बाद बाइक से होते थे फरार

ग्वालियर. पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सवार होकर घटना करने वाले कन्नौज उत्तरप्रदेश के गिरोह से पुलिस ने कई अहम जानकारी जुटाई है। चोरी की घटना की कहानी सामने आने के बाद पुलिस भी आश्चर्य चकित है। चोर गिरोह मोटरसाईकिल पर सवार होकर कन्नौज से ग्वालियर आता था। 250 किमी की यात्रा करने के बाद थक जाता था तो लग्जरी होटल में एसी रूम किराये पर लेकर ठहरता था।
इसके बाद अगले दिन बस स्टैंण्ड, रेलवे स्टेशन के आसपास सक्रिय होकर ऐसे यात्रियों का चयन करते थे जो बाहर से आ रहे थे। इनके साथ ई-रिक्शा, टैम्पो व ऑटो में सवार होकर उनके बैग से गहने-नगदी पार कर लेते थे। चोरी करने के बाद बाइक उठाकर कन्नौज निकल जाते थे। 10 से 15 दिन में अय्याशी करने के बाद फिर वापिस आते थे।
क्या है घटनाक्रम
ग्वालियर पुलिस ने बदमाशों की तलाश के लिए चार शहर का नाका से अमायन भिण्ड तक के बीच करीब 78 किलोमीटर के रूट पर 1500 के करीब CCTV कैमरे खंगाले तो पता चला कि बदमाश भिण्ड से एक कारोबारी के पीछे लगे हुए थे और बस में भी साथ ही सवार होकर आए थे, लेकिन मौका नहीं लगा।
इसके बाद जब कारोबारी परिवार सहित ई-रिक्शा में सवार हो गया तो यह गिरोह का एक सदस्य उनके साथ सवार हो गया। जैसे ही मौका मिला वह वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया था। इसके बाद पुलिस को CCTV कैमरे की फुटेज में ई-रिक्शा से उतरकर युवक बाइक सवार साथी के साथ भागता दिखा। बाइक पर कन्नौज उत्तर प्रदेश का रजिस्ट्रेशन नंबर था। फुटेज के आधार पर कन्नौज पहुंची और वहां से एक चोर नरेन्द्र कंजर को दबोचकर उससे वारदात में चोरी किया गया 22 लाख रुपए का
250 किमी दूर से आकर करते थे चोरी
प्ुलिस ने जब बदमाश को निगरानी में लेकर पूछताछ की तो कई सवालों के जवाब मिले। पुलिस का सवाल था कि करीब 250 किमी दूर आकर वह ग्वालियर में ही क्यों सवारी वाहनों को टारगेट करते थे। इस पर बदमाश ने बताया कि ग्वालियर उनको सॉफ्ट टारगेट लगता था। यहां पुलिस आसानी से इस तरह की चोरी पर एक्शन नहीं लेती थी। कई मामलों मे ंतो 2 से 3 दिन चक्कर लगवाने के बाद पुलिस मामला दर्ज कर जांच शुरू करती थीं इतने समय में वह शहर छोड़कर अपने शहर पहुंचने केलिये काफी होता था।
ऐसे करते थे चोरी
कन्नोज यूपी का चोर गिरोह के वारदात करने का तरीका अलग ही है। गिरोह के एक या दो सदस्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सवार होकर वारदात के लिये तैयार रहते हैं। जबकि एक साथी मोटरसाईकिल से पीछे-पीछे चलता रहता है। जैसे ही बैग से कैश या गहने चोरी की वारदात को अंजाम दे दिया जाता है तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट को रूकवाकर चोर उतरकर बाइक पर सवार होकर फरार हो जाते हैं। इस गैंग के अधिकतर टारगेट ई-रिक्शा में सवार यात्री होते थें