तहसीलदार शत्रुघ्नसिंह चौहान के आदेश में गलतियां, प्रभारी आयुक्त ने नोटिस में 7 दिन में मांगा जबाव


ग्वालियर. एक बार फिर सिटीसेंटर तहसील के तत्कालीन तहसीलदार शत्रुघ्नसिह चौहान चर्चाओं में है। अब संभागीय आयुक्त ने उनको अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिये नोटिस जारी किया है और साथ ही एक सप्ताह में जबाव देने के लिये कहा है। तत्कलीन तहसीलदार के महलगांव पुराना आरटीओ कार्यालय पड़ाव व केदारपुर की जमीन को लेकर दिये गये त्रुटिपूर्ण आदेश उनके लिये अब परेशानी का सबब बन गये हैं।
केदारपुर की जमीन को निजी शासकीय घोषित करने के लिये तत्कालीन तहसीलदार ने जो आदेश निकाले थे। उनमें कई बड़ी खामियां थी। यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद 6 अप्रैल को उन्हें पद से हटा दिया गया था। लेकिन यह आदेश 15 अप्रैल को आरसीएमएस पोर्ट पर रजिस्टर्ड हुआ था। इस तरह की खामियां महलगांव व पुराना आरटीओ कार्यालय की जमीन के आदेश में थी। जिस पर प्रभारी संभागीय आयुक्त रूचिका चौहान ने नोटिस जारी किया है।
ऐसे समझिये -क्या है मामला
ग्वालियर में यौन प्रताड़ना के आरोपों से लेकर महंगी व बेशकीमती जमीनों को लेकर साक्ष्यों को अनदेखा कर त्रुटिपूर्ण आदेश जारी कर पदीय दायित्वों के विपरीत आचरण करना तत्कालीन तहसीलदार सिटी सेंटर शत्रुघ्न सिंह चौहान को भारी पड़ने जा रहा है। प्रभारी संभाग आयुक्त रुचिका चौहान ने उनके खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कारण बताओ नोटिश जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है। तत्कालीन तहसीलदार चौहान को उन पर लगे आरोपों पर सात दिन के भीतर जवाब पेश करना है। यदि उनके जवाब से प्रभारी संभागीय आयुक्त संतुष्ट नहीं होती हैं, तो शत्रुघ्न सिंह चौहान पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होना तय है। सिटी सेंटर क्षेत्र के तत्कालीन तहसीलदार शत्रुघ्न चौहान पर महलगांव, पुराना आरटीओ कार्यालय पड़ाव एवं केदारपुर क्षेत्र की जमीनों के संबंध में तथ्यों को अनदेखा करते हुए त्रुटिपूर्ण आदेश जारी कर पदीय दायित्वों का दुरुपयोग करने के आरोप हैं।
महलगांव की जमीन का यह है विवाद
ग्वालियर में प्रशासन और भू माफिया की साठगांठ का एक और नया मामला सामने आया था। महलगांव की जमीन के मामले में एक ही भूखंड को दो बार बेच गया और इतना ही नहीं सरकारी नाले का नामांतरण कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने भनक लगने पर प्रशासन के अधिकारियों को चेताया भी लेकिन कुछ नहीं हुआ। नामांतरण होने के बाद एसडीएम कोर्ट में अपील की जिसमें झांसी रोड एसडीएम विनोद सिंह ने पाया कि भू-माफिया और तत्कालीन उपपंजीयक ने यह जानते हुए कि मौके पर जमीन नही है, इसके बाद भी रजिस्ट्री कर दी और नामांतरण भी हो गया। इस मामले में तत्कालीन सिटी सेंटर तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान की भूमिका संदिग्ध रही थी। जिन्होंने इस जमीन का नामांतरण कर दिया। एसडीएम ने नामांतरण को निरस्त करते हुए अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि तहसीलदार शत्रुघ्न चौहान ने न्यायालय की गरिमा को दूषित किया।
केदारपुर जमीन को लेकर यह है विवाद
सिटी सेंटर क्षेत्र के तत्कालीन तहसीलदार शत्रुघ्न सिंह चौहान पर अप्रैल माह में यौन प्रताड़ना के आरोप लगे थे। हालांकि इसमें गोपनीय शिकायत हुई थी और फरियादी के सामने नहीं आने पर समिति ने आनन-फानन में उनको निर्दोष साबित कर दिया था। पर आरोप लगने के तत्काल बाद 6 अप्रैल को तत्कालीन तहसीलदार को सिटी सेंटर तहसीलदार के पद से हटाकर कलेक्टर में अटैच किया गया था। इसके बाद भी उन्होंने एक आदेश जारी किया था जिसमें केदारपुर की निजी जमीन को शासकीय घोषित कर दिया था। यह आदेश पांच अप्रैल को पारित होना बताया गया था, लेकिन राजस्व विभाग के RCMS पोर्टल पर यह 15 अप्रैल को रजिस्टर्ड हुआ था, लेकिन पांच अप्रैल को आदेश में जो रजिस्टर्ड नंबर लिखा गया था वह पोर्टल पर एक आर्थिक सहायता का प्रकरण निकल रहा था। हालांकि तहसीलदार ने इस पर ऑफिस के बाबू की लापरवाही बताई थी, जबकि बाबू का कहना था कि जब फाइल मिलेगी तभी रजिस्टर्ड होगी। इस मामले में जमीन मालिक ने आदेश को फर्जी व कूट रचित बताते हुए शिकायत की थी और उनके आदेश पर स्टे लिया था।