शिक्षा हमारी माटी के आदर्शों के अनुकूल हो:श्री मंगुभाई पटेल

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप हमारी माटी के आदर्शों के अनुकूल होना चाहिए। इससे युवाओं में राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत की जा सकती है। विद्यार्थी दीक्षांत शपथ का जीवन भर अनुसरण करे, अपने माता-पिता और गुरूजनों का सम्मान करे। श्री पटेल आज अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। दीक्षांत समारोह का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया।

अटल जी की तरह दुनिया में हिन्दी का परचम लहराये

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिवस पर उनको नमन किया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से आव्हान किया कि वे भी अटलजी की तरह पूरी दुनियाँ में हिन्दी का परचम लहराये और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करे। हिन्दी के प्रचार-प्रसार और उस को लोकप्रिय बनाने में स्वर्गीय अटल जी का योगदान ऐतिहासिक और अनुकरणीय है। वे महान हिन्दी सेवी, कवि हृदय और प्रखर वक्ता के रूप में सदैव याद किये जाएंगे। श्री पटेल ने स्व. अटल जी से जुड़ा अपने जीवन काल का प्रसंग भी सुनाया।

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने सिकल सेल एनिमिया जागरूकता प्रयासों में बेहतर कार्य किया है। विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े हुए विभिन्न शास्त्रों के ज्ञान-विज्ञान को पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में आधुनिक और भारतीय संस्कृति के परंपरागत ज्ञान का समन्वय करते हुए युवा पीढ़ी को बंधन मुक्त शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल शिक्षण की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि जीवन की चुनौतियों को स्वीकार ने, सामना करने और भविष्य के लक्ष्यों को तय करने का माध्यम है। शिक्षण संस्थान ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करे जो समग्र व्यक्तित्व के विकास के साथ रोजगार कौशल में विश्व स्तरीय और चारित्रिक दृष्टि से उत्कृष्ट और संस्कारित हो।

हर नौजवान बन सकता है हिंदुस्तान की तरक़्क़ी का कारण

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि देश का हर नौजवान हिंदुस्तान की तरक़्क़ी का कारण बन सकता है। युवा अपने सपने को प्राप्त करते हुए राष्ट्र निर्माण में सहयोग कर सकता है। आप सभी अपने ज्ञान, कौशल, चरित्र से और सामर्थ्य से 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प ले। दीक्षांत तक की यात्रा कठिन परिश्रम से सम्भव हुई है, यहाँ से नई ऊचाईयों पर पहुँच कर देश-प्रदेश और परिवार का नाम रोशन करे।