राजा तो महाकाल है हम तो उनके बेटे, सीएम मोहन यादव ने उज्जैन में रात बिताने का मिथक तोड़ दिया

उज्जैन. मध्यप्रदेश के नये मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तूफानी अंदाज में शुरूआत की है जब से शपथ ली है तबसे नये ऐलान और नये आदेश दे रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने एक मिथक तोड़ दिया है। उज्जैन को लेकर एक मिथक रहा है कि यहां मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री रात नहीं बिताते हैं। लेकिन नये सीएम मोहन यादव ने शनिवार की रात उज्जैन में बिताकर इस मिथक को तोड़ दिया है। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक भी है और सीएम बनने के बाद वह शनिवार को यहां पहुंचे और रात बिताई। इसके लेकर उन्होंने कहा है कि महाकाल तो राजा हैं हम उनके बेटे हैं। जनता को संबोधित करते हुए मंत्रिमण्डल विस्तार के बाद पहली कैबिनेट उज्जैन में करने और शहर के कई मुद्दों पर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा कि मैं मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं मुख्य सेवक हूं।
सीएम मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं मुख्य सेवक के रूप में काम करूंगा। मैंने कलेक्टर से कह दिया है कि पहले केडी गेट का काम दिखाना बहुत दिनों से अधूरा पड़ा है उसके बाद ही घर जाऊंगा। उसका निराकरण करना है। विधायक अनिल जैन का नाम लेते हुए बोले कि यह सेट्रल लाइटिंग की बात कर रहे। मैंने कहा तुम्हारे भाई के पास है लगा देंगे विकास मे ंतो लगाना है। मुख्यमंत्री ने शहर के प्राचीन गोपाल मंदिर क्षेत्र से चौड़ीकरण की बात भी कहीं। मिथक को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जाने अनजाने अपने उज्जैन में एक घटना हुई तो राजनीतिक घटना हुई। कोई कारण से उज्जैन जो कि राजधानी हुआ करती थी उसे ग्वालियर शिफ्ट किया जाना था। राजधानी ले जानी थी तो ग्वालियर जब दोलतरावजी के समय 1812 मे राजधानी गई तो उस समय क्या समीकरण बनाया गया कि एक तो राजधानी ले गए दूसरा धीरे से एक मंत्र फूंक गए कि भैया यहां राजा रात नहीं रहेगा तो परवारे ही निपटगया कि भैया आएगा ही नहीं दूसरा कब्जा करने के लिए। ये थी उस समय की राजनीतिक रणनीति।