यूनिटों में मेजर और कैप्टन रैंक के अफसरों की भारी कमी! समस्या से निपटने के लिए सेना उठा सकती है ये कदम
नई दिल्ली. भारतीय सेना इस वक्त मेजर और कैप्टन रैंक पर अफसरों की भारी कमी का सामना कर रही है. सेना अब यूनिटों में अफसरों की कमी को दूर करने के लिए विभिन्न मुख्यालयों में स्टाफ अफसरों की पोस्टिंग को कम करने की योजना बना रही है और ऐसे पदों पर रिटायर होने के बाद सेवा दे रहे अधिकारियों को तैनात करने पर विचार कर रही है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने हाल ही में इस प्रस्तावित कदम की व्यवहार्यता पर विभिन्न कमांडों से जानकारी मांगी है. इस वक्त मेजर रैंक के मध्य स्तर के अफसरों को लगभग छह साल की सेवा पूरी होने पर विभिन्न कोर, कमांड और डिवीजन मुख्यालयों में स्टाफ तैनाती का पहला अनुभव दिया जाता है.
एक स्टाफ तैनाती का मतलब एक मुख्यालय में पोस्टिंग से है, जहां अफसर विभिन्न विषयों की नीति और समन्वय को संभालता है. जबकि एक यूनिट तैनाती में अफसर मुख्य रूप से संचालन और जमीनी कामों के लिए जिम्मेदार होता है. स्टाफ तैनाती का अनुभव उन्हें उनकी सेवा के दौरान बाद की कमांड नियुक्तियों के लिए तैयार करता है. फिलहाल सेना में आर्मी मेडिकल कोर और आर्मी डेंटल कोर समेत 8,129 अफसरों की कमी है. नौसेना और एयरफोर्स में क्रमशः 1,653 और 721 अफसरों की कमी है. अफसरों की इस कमी को ध्यान में रखते हुए सेना ने पहले जहां भी संभव हुआ, कुछ स्टाफ अफसरों की नियुक्तियों में 461 गैर-सूचीबद्ध अफसरों को तैनात किया था.
सेना के मौजूदा प्रस्ताव में मुख्यालय में इन स्टाफ तैनातियों में अस्थायी रूप से कुछ कटौती करना भी शामिल है, जब तक कि फोर्स में अफसरों की कमी खत्म न हो जाए. इस दिशा में यह प्रस्ताव दिया जा रहा है कि जूनियर और मध्य स्तर के जो अफसर मौजूदा वक्त में विभिन्न मुख्यालयों में स्टाफ तैनातियों में हैं, उनको 24 महीने का अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा करने के बाद बिना किसी राहत के बाहर तैनात कर दिया जाएगा. अफसरों के मुताबिक सेना ऐसी नियुक्तियों के लिए दोबारा नियुक्त किए गए अधिकारियों की तैनाती पर विचार कर रही है. दोबारा नियुक्त अधिकारी वे होते हैं, जो रिटायरमेंट के बाद दो से चार साल तक सेना में सेवा करते हैं और ब्रिगेडियर और कर्नल के पद पर होते हैं.