चीन में कोरोना से भारतीय EV इंडस्ट्री पर संकट! ग्राहकों पर क्‍या होगा असर?

नई दिल्ली. चीन में एक बार फिर कोरोना महामारी ने भयानक रूप धारण कर लिया है. यहां हर दिन लाखों लोग संक्रमित हो रहे हैं. ऐसी स्थिति के चलते अब दुनिया भर के उद्योगों पर एक बार फिर संकट मंडराने लगा है. भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग की बात करें तो इसे भी सप्लाई चेन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि चीन बैटरी और इलेक्ट्रिक व्हीकल के अन्य महत्वपूर्ण घटकों का मुख्य निर्माता देश है.

भारत में बैटरी निर्माता काफी हद तक चीन के सप्लायर्स पर निर्भर हैं. निर्मताओं का मानना ​​है कि जब तक चीन में महामारी नियंत्रण में आएगी, तब तक देश जनवरी में चीनी नव वर्ष के लिए बंद हो जाएगा. समस्या यह है कि किसी भी भारतीय ईवी निर्माताओं के पास जनवरी से आगे की सप्लाई नहीं है, क्योंकि फरवरी में डिलीवरी के लिए सेल ऑर्डर अभी तक नहीं दिए गए हैं. भारतीय आयातकों का कहना है कि जनवरी में प्राप्त होने वाली डिलीवरी, जिसके लिए सप्ताह पहले दिए गए ऑर्डर या तो ट्रांजिट में हैं या चीन के गोदामों में पड़े हैं.

कोरोना से चीन में स्थिति बेहद खराब
ट्रोनटेक के संस्थापक और सीईओ समरथ कोचर ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को बताया कि चीन में ज्यादातर सप्लायर संक्रमित हैं. वहां स्थिति काफी खराब है. कारखानों में 50% कर्मचारी काम कर रहे हैं. ट्रोनटेक कई भारतीय कंपनियों में से एक है, जो चीन में उत्पादित सेल से बनी बैटरियों को असेंबल करती है. ट्रोनटेक इन बैटरियों को टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहन निर्माताओं को सप्लाय करता है.
बैटरी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर भारत
भारत में सेल उत्पादकों की संख्या न के बराबर है. चीन का भारतीय बाजार में बैटरी आपूर्ति पर लगभग एकाधिकार नियंत्रण है. पिछले वित्त वर्ष में भारत द्वारा खपत किए गए लिथियम-आयन उत्पादों में से 73% चीन से थे. टीवीएस मोटर कंपनी जैसे कुछ भारतीय वाहन निर्माताओं ने केवल देश के बाहर से आने वाले सेल के साथ उच्च स्तर का स्थानीयकरण हासिल किया है.