Ukraine-Russia war: यूक्रेन में फंसे भारतीयों की हर हाल में वतन वापसी में जुटी सरकार, पड़ोसी देशों से होंगी उड़ानें

यूक्रेन पर हुए रूसी हमले के बाद वहां पर भारी संख्या में भारतीय नागरिक फंस गए हैं. इनमें सबसे बड़ी संख्या स्टूडेंट्स की है. इन सभी लोगों को यूक्रेन से निकालने के लिए अब सरकार ने जोर-शोर से कोशिशें शुरू कर दी हैं. इन लोगों को पहले जमीन के रास्ते यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजा जाएगा. फिर वहां से एयर इंडिया की विशेष उड़ानों से इनको भारत वापस लाया जाएगा. इस तरह की पहली निकासी उड़ानें आज रोमानिया और हंगरी भेजी जाएंगी. यूक्रेन की सीमाओं से जमीनी रास्ते के माध्यम से अपने नागरिकों को निकालने के लिए भारत ने हंगरी, पोलैंड, स्लोवाक गणराज्य और रोमानिया के साथ बात की है.

विदेश मंत्रालय ने इसके लिए यूक्रेन की पश्चिमी सीमाओं पर अपनी कई टीमें भेज दी हैं. इसके बाद केंद्र सरकार ने रोमानिया और हंगरी से उड़ानों के माध्यम से भारतीय नागरिकों को निकालने के अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया है. सरकार ने शनिवार को दिल्ली और मुंबई से एयर इंडिया की उड़ानें रोमानिया के बुखारेस्ट और हंगरी के बुडापेस्ट के लिए भेजने की व्यवस्था की है. इसके साथ ही भारत हंगरी, पोलैंड, स्लोवाक गणराज्य और रोमानिया के साथ यूक्रेन की जमीनी सीमाओं के माध्यम से अपने नागरिकों को निकालने के लिए सहयोग मांग कर रहा है. जहां से उन्हें स्वदेश भेजा जाएगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि यूक्रेन से भारतीय लोगों का पहला जत्था सुसेवा सीमा पार करके रोमानिया पहुंच गया है.

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार इस अभियान के लिए 256 सीटों वाले बोइंग 787 विमान का उपयोग किया जाएगा. वंदे भारत मिशन के तहत ये सभी उड़ानें संचालित की जाएंगी. जबकि एयर इंडिया ने एक बयान में कहा कि एयर इंडिया 26 फरवरी को दिल्ली और मुंबई से बुखारेस्ट (रोमानिया) और बुडापेस्ट (हंगरी) के लिए B787 विमानों से उड़ानों का संचालन करेगी. क्योंकि फंसे हुए भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए ये विशेष सरकारी चार्टर उड़ानें हैं.

विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसकी टीमों को हंगरी में ज़ाहोनी सीमा चौकी, पोलैंड में क्राकोविएक सीमा, स्लोवाक गणराज्य में विसने नेमेके और रोमानिया में सुसेवा सीमा पर पहले ही भेजा दिया गया था. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन, रूस और इन चारों पड़ोसी देशों के विदेश मंत्रियों से इस बारे में बात की है. सूत्रों ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने पश्चिमी यूक्रेन के ल्वीव और चेर्नित्सि शहरों में भी अपने कैम्प ऑफिस खोले हैं. ताकि भारतीयों को हंगरी, रोमानिया और पोलैंड में भेजा जा सके. भारत सरकार रूसी भाषा जानने वाले अधिकारियों को इन कैम्प ऑफिसों में भेज रही है.