यूक्रेन से लौटी आफरीन ग्वालियर में कदम रखते ही रो पड़ी
बात करते करते रोने लगी युक्रेन सुमी स्टेट युनिर्वसिटी से एमबीबीएस कर रही आफरीन खान। मैं आ गई खुद के लिए के क्या बोलू, मेरे पैरेंटस के जितना बाकी स्टूडेंट के पैरेंटस भी परेशान हैं। साथ ही, आफरीन ने सरकार से गुजारिस भी की है कि, वहां फंसे स्टडेंट को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की व्यवस्था करें। आफरीन ने कहा कि, मैं जब वहां पर थी तो ये अंदाजा नहीं था कि, युद्ध हो सकता है। सिर्फ बॉर्डर पर ही दिक्कत थी। लेकिन, लंबे समय से वहां युद्ध की बातें चल रही थीं। हालांकि, लोकल गवर्नेंस उसे अफवाह बता रहा था तो हम भी उसे अफवाह ही मान रहे थे।
बता दें कि, मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रहने वाली आफरीन खान साल 2016 से युक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। मंगलवार को टिकट करा के बुधवार की शाम को निकली निकलने तक वहां पर स्थिती ठीक थी। दिल्ली एयर पोर्ट पहुंची तो पता चला कि, वहां युद्ध शुरु भी हो चुका है। मेरे सारे फ्रेन्डस वहां फंस गए। आफरीन ने बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि यूक्रेन में भारत के करीब 10 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं। जिस विश्वविद्यालय में वो पढ़ाई करती थीं वहीं भारत के लगभग 500 से 600 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से ग्वालियर के ही दो और स्टूडेंट्स को तो मैं ही जानती हूं।
वहां रहने वाले सभी स्टूडेंट्स को ये निर्देश दिए गए हैं कि, वो कम से कम दस से बारह दिनों का खाने पीने को सामान रख लें। काई भी स्थिती बन सकती है। बड़ी समस्या ये है कि, बिजली काट वहां बिजली कट हुई तो उनके फोन भी बंद हो जाएंगे। उनसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो सकेगा। ऐसे में सरकार से मेरी अपील है कि, वो जल्द से जल्द सभी को वापस भारत लाने की व्यवस्था करें।