India-China Standoff: चीन की नापाक कोशिशों पर लगेगी लगाम! उत्तरी और पूर्वी कमान में नए कमांडर तैनात
नई दिल्ली. चीन (China) से जारी तनाव के बीच भारतीय सेना (Indian Army) ने उत्तरी और पूर्वी कमान में कुछ बदलाव किए हैं. मंगलवार को इन दोनों कमानों में नए कमांडर की नियुक्ति की गई है. खास बात है कि चीन के साथ सीमा पर उत्तरी और पूर्वी कमान रक्षा करती है. भारत और चीन के बीच करीब 21 महीनों से तनाव जारी है. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच 41 दौर की सैन्य स्तर की वार्ता भी हो चुकी है.
लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को उधमपुर में सेना की उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का कार्यभाल संभाला. लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी के सोमवार को सेवानिवृत्त होने पर लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने यह पद संभाला है. अपने 40 वर्ष के शानदार करियर में लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने भारतीय सेना में अनेक अहम पदों पर सेवाएं दीं. वहीं, लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कलिता ने कोलकाता मुख्यालय वाली पूर्वी कमांड का कार्यभार संभाला है.
द्विवेदी और कलिता दोनों ही सैन्य कमांडर बनाए जाने से पहले सेना मुख्यालय में उप प्रमुख पद पर थे. जम्मू में सेना के जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया कि उत्तरी कमान का कार्यभार संभालने के पश्चात जनरल ऑफिसर ने उत्तरी कमान के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और ध्रुव युद्ध स्मारक पर माल्यार्पण किया. बाद में उन्होंने सभी सैनिकों को अपनी बधाई दी और उत्तरी कमान के अपने पूर्ववर्तियों एवं सभी सैनिकों के शानदार कार्य को आगे ले जाने का अपना संकल्प व्यक्त किया.
रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेद्वी को जम्मू कश्मीर राइफल्स रेजीमेंट में कमीशन मिला था और 37 साल के अपने करियर के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में अलग अलग पदों पर अपनी सेवाएं दीं. प्रवक्ता के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी रीवा के सैनिक स्कूल, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) एवं भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व छात्र हैं. उन्होंने डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज से स्नातक किया तथा आर्मी वार कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय से से हाइयर कमांड कोर्स किया जो अमेरिका के स्टेट आर्मी वार कॉलेज के कोर्स के समतुल्य है.
प्रवक्ता के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेद्वी कश्मीर घाटी में अपनी बटालियन, भारत म्यांमार सीमा पर असम राइफल्स की कमान संभाल चुके हैं. इसके अलावा भी वह कई अहम पदों पर रह चुके हैं एवं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं.
खास बात है कि द्विवेदी ने भारत और चीन के बीच हुई 14वें दौर की वार्ता के कुछ हफ्तों बाद ही यह कार्यभार संभाला है. 12 जनवरी को हुई अंतिम बैठक में कोई खास नतीजा नहीं निकल सका था. हालांकि, दोनों पक्ष संपर्क में रहने और लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बचे हुए मुद्दों को वार्ता के जरिए सुलझाने पर सहमत हो गए थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों सेनाओं ने कहा था कि 15वें दौर की वार्ता जल्द ही आयोजित होना चाहिए. इसके अलावा कलिता ने भी ऐसे समय पर कार्यभार संभाला है, जब चीनी सेना ने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के पास गतिविधियां बढ़ा दी हैं.